हस्तियों की चोरी छिपे फ़ोटो लेने वालों के दिन लद गए?

सैंटियागो बायज़ 1990 के दशक की शुरुआत से ही पपराज़ी (मशहूर और चर्चित हस्तियों का पीछा करने वाले पत्रकार) रहे हैं.

हाथ में कैमरा लिए हुए वह न्यूयॉर्क के कई नामी और मशहूर लोगों के विवाहेतर संबंधों, बच्चे के जन्म, मृत्यु, नये प्यार और ब्रेकअप के गवाह रहे हैं.

बायज़ जैसे पपराज़ी के लिए रोजी-रोटी कमाना आसान नहीं है. उनके पास शहर के मशहूर लोगों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए.

साथ में ड्राइवरों, दुकानदारों और रेस्तरां कर्मचारियों का नेटवर्क होना चाहिए, जो किसी सेलिब्रिटी के दिखने पर उन्हें तुरंत बता दें. कई बार सेलिब्रिटीज़ ख़ुद ही सोशल मीडिया पर कोई संकेत छोड़ देते हैं.

नामी-गिरामी लोगों के बारे में कोई जानकारी मिलते ही वे फोटोग्राफरों को उनके बारे में सचेत करते हैं. कई बार वे किसी एजेंसी से भी फोटोग्राफर किराये पर लेते हैं.

ज़्यादातर तस्वीरों का कोई मोल नहीं होता, लेकिन नये बच्चे की कोई तस्वीर या नये प्रेमी-प्रेमिका को चूमते हुए किसी सेलिब्रिटी की तस्वीर या उनकी शादी की तस्वीर रातोंरात तकदीर बदल सकती है.

वर्षों की ट्रेनिंग और सेलिब्रिटीज़ के बारे में ज्ञान के बावजूद बायज़ की आमदनी निश्चित नहीं है.

पपराज़ी की किस्मत कुछ मुट्ठी भर लोग निर्धारित करते हैं, जैसे कि पीटर ग्रौसमैन, जो 2003 से 2017 के बीच अस (Us) साप्ताहिक के फोटो एडिटर थे.

ग्रौसमैन ने कभी पपराज़ी के साथ सीधे काम नहीं किया. बायज़ जैसे फोटोग्राफर अपनी तस्वीरें एक एजेंसी को बेचते हैं जिसका तालमेल ग्रौसमैन जैसे फोटो संपादकों से होता है.

फोटोग्राफर को तस्वीर की कीमत का 20 से 70 फीसदी हिस्सा मिलता है. यह उसकी पहचान और एजेंसी से उसके मोलभाव पर निर्भर करता है.

वरिष्ठ, कुशल और प्रतिभाशाली पपराज़ी फोटोग्राफर बेहतर शर्तों पर काम करते हैं. इनमें किसी एक एजेंसी को ही एक्सक्लूसिव तस्वीरें बेचने की शर्त भी शामिल होती है.

टैबलॉयड की दुनिया में तहलका मचा देने वाली एक्सक्लूसिव तस्वीरों को बड़ी कीमत मिल सकती है.

ग्रौसमैन ने अभिनेत्री क्रिस्टेन स्टीवर्ट और रूपर्ट सैंडर्स (स्नोव्हाइट और हंट्समैन के शादीशुदा डायरेक्टर) की तस्वीरों के लिए छह अंक में रकम अदा की थी. उन तस्वीरों में स्टीवर्ट सैंडर्स को कसकर भींचे हुई थीं.

ग्रौसमैन ने पपराज़ी फोटोग्राफी के अच्छे दिन देखे हैं. 2000 के दशक की शुरुआत में उन्होंने "जस्ट लाइक अस" तस्वीरों को लोकप्रिय बनाया था.

कॉफी खरीदते या पेट्रोल भरवाते सेलिब्रिटीज़ की तस्वीरें पत्रिका के पाठकों के बीच हिट साबित हुई थीं.

जल्द ही, कई सारे अखबारों-पत्रिकाओं में ऐसी तस्वीरें छपने लगीं, जिससे इंडस्ट्री के सुनहरें दिनों की शुरुआत हुई. यह वही समय था जब पेरिस हिल्टन, ब्रिटनी स्पीयर्स और लिंडसे लोहान की लोकप्रियता शिखर पर थी.

तस्वीर की कीमत इस बात से निर्धारित होती थी कि सेलिब्रिटी क्या कर रही है और क्या वह तस्वीर एक्सक्लूसिव हैय

पपराज़ी के सुनहरे दिनों में कोई एक्सक्लूसिव "जस्ट लाइक अस" तस्वीर 5,000 डॉलर से लेकर 15,000 डॉलर तक में आराम से बिक जाती थी.

तुरंत पैसे कमाने के लिए कई नये फोटोग्राफर इस पेशे में आए. वे कानून तोड़ने के लिए तैयार थे. उन्होंने पपराज़ी के पेशे की और ज़्यादा बदनामी करायी और सेलिब्रिटीज़ और उनके बच्चों को तंग करने की हद तक चले गए.

ग्रौसमैन ने सभी से संभलकर रहने, तस्वीरों के लिए कम भुगतान करने और फोटो के लिए कानून तोड़कर ख़ुद की और दूसरों की ज़िंदगी दांव पर न लगाने की अपील की, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ.

लेकिन वैश्विक वित्तीय संकट और ऑनलाइन मीडिया के उदय ने सब बदल दिया. डिजिटल मीडिया ने सेलिब्रिटीज़ की तस्वीरों की मांग बढ़ाई लेकिन तस्वीरों के भाव कम कर दिए.

फोटो एजेंसियों ने अपना बिज़नेस संगठित किया या फिर समेट लिया. जो बच गए उन्होंने अपना बिज़नेस मॉडल बदल लिया.

पत्रिकाओं से हर तस्वीर के लिए पैसे लेने की जगह उन्होंने सदस्यता सेवा का प्रस्ताव रखा, जिसमें प्रकाशक एजेंसी की जितनी मर्ज़ी उतनी फोटो छापने के लिए आज़ाद होते हैं.

इस मॉडल में पपराज़ी फोटोग्राफर को सदस्यता शुल्क का एक छोटा हिस्सा मिलता है, जो इस पर निर्भर करता है कि महीने में उसकी कितनी तस्वीरें छपीं.

इसका मतलब है कि कोई एक्सक्लूसिव तस्वीर जिसके लिए पहले 5,000 डॉलर से लेकर 15,000 डॉलर तक मिलते थे, उसे अब सिर्फ़ 5 से 10 डॉलर मिलते हैं.

पपराज़ी की आमदनी घटती ही जा रही है. अब मोटा पैसा कमाने के लिए उन्हें दुर्लभ तस्वीर खींचने की जरूरत है.

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